भूख और चोट के चलते हुई थी हमलावर

दमोह। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के मोहली परिक्षेत्र में रविवार को एक श्रमिक को बाघ ने घायल करने के बाद वन अमले ने उसकी पहचान और तलाश करते हुए गुरुवार को उसे ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया गया। परीक्षण के दौरान बाघिन का पेट लगभग खाली था और उसके पैरों में सूजन मिली जिसके चलते आगामी विस्तृत परीक्षण एवं उपचार हेतु उसे सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ हेल्थ एंड फॉरेंसिक जबलपुर रवाना किया गया है। वन अमले ने जानकारी देते हुए बताया कि घटना के बाद गश्त पर उपस्थित महिला वनरक्षक के द्वारा बताये गये विवरण के बाद सर्च कार्यवाही में दिनांक 7-7.2026 को एक बाघिन मिली थी जिसकी आयु लगभग 15 से 18 महीने थी और अनुमान था कि संभवतः यह वही बाघिन है जिसके द्वारा उक्त कर्मचारी पर हमला किया गया था। उक्त बाघिन के व्यवहार को समझने के लिए हाथियों के द्वारा सतत गस्त कर बाघिन के व्यवहार का निरीक्षण किया जा रहा था।
निरीक्षण में सामने आई भूख और चोट
दिनांक 8.7.2026 को हाथियों के महावत के द्वारा एवं बाद में स्थानीय अधिकारियों द्वारा अवलोकन में प्रतीत हुआ कि उक्त बाघ शावक कुछ दिनों से भूखा है और संभवतः उसके पिछले पैरों मे कोई चोट आदि है जिसके कारण उसके चलने की शैली सामान्य नहीं है इस संबंध में मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक को अवगत कराया जिनके द्वारा सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणी विशेषज्ञ एवं चिकित्सक, डॉ. गुरुदत्त शर्मा को एवं सेंटर फॉर वाइल्ड लाइफ हेल्थ एंड फारेंसिक जबलपुर को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व सागर आकर उक्त बाघ के परीक्षण हेतु निर्देशित किया गया जिसके बाद गुरुवार को उसे ट्रेंकुलाइज कर भेजा गया है। कार्यवाही में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणी विशेषज्ञ एवं चिकित्सक, डॉ. गुरुदत्त शर्मा सहित वन अमले की भूमिका रही।
तेंदूखेड़ा से सहयोगी विशाल रजक