आपराधिक मामलों में चोट नहीं, अपराधी की नीयत महत्वपूर्ण
न्यायालय ने सगे भाई को गोली मारने के दोषी को 8 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा, जमीनी विवाद के चलते दिया था घटना को अंजाम
दमोह। अपर सत्र न्यायाधीश पंकज कुमार वर्मा ने देहात थाना के ग्राम सरखड़ी में जमीनी विवाद के चलते छोटे भाई को गोली मारने के मामले में आरोपी बड़े भाई को दोषी मानते हुए 8 वर्ज के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायालय ने मामले के आरोपी रमेश पटेल को भादवि की धारा 307 के अंतर्गत 8 वर्ष, आयुध अधिनियम की धारा 27 के तहत 7 वर्ष तथा धारा 25 के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास के दंड के साथ आरोपी पर 1800 रुपये का अर्थदंड भी आरोपित किया है।
पंचायत चुनाव के लिए आया था पीड़ित
मामले में शासन की ओर से पैरवी करने वाले शासकीय अधिवक्ता राजीव बद्री सिंह ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि घटना दिनांक 24 जून 2022 को थाना दमोह देहात अंतर्गत ग्राम सरखड़ी निवासी संतोष पटेल, जो दिल्ली में निवास करता था, पंचायत चुनाव में मतदान करने के लिए दिल्ली से दमोह आया था। वह सुबह करीब 10:30 बजे अपने गांव सरखड़ी पहुंचकर मनोहर पटेल की किराना दुकान से बीड़ी खरीद रहा था। इसी दौरान उसका बड़ा भाई रमेश पटेल वहां पहुंचा, जिसके साथ उसका लंबे समय से जमीनी विवाद चल रहा था।हत्या के इरादे से मार दी गोलीआरोपी ने अपने भाई की देखकरकहा कि “तू फिर दिल्ली से आ गया है, आज तुझे जान से खत्म कर दूंगा” और इसी दौरान उसने कमर के पीछे से बंदूक निकालकर उसके सीने पर गोली चला दी। गोली लगने से संतोष गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा, जबकि आरोपी मौके से फरार हो गया। ग्रामीणों की सहायता से घायल को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जबलपुर रेफर किया गया। इलाज के दौरान उसकी जान बच सकी।
पुलिस जांच रही महत्वपूर्ण
घटना की रिपोर्ट थाना दमोह देहात में दर्ज की गई। इस दौरान पुलिस महकमे की ओर से विवेचना अधिकारी गरिमा मिश्रा न्यायालय में साक्ष्यों का संकलन कर अभियोजन पक्ष द्वारा 11 साक्षियों के बयान कराए गए। वहीं बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पंचायत चुनाव के दौरान किसी अन्य व्यक्ति से विवाद के कारण संतोष को चोट लगी थी और आरोपी को झूठा फंसाया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि घायल के शरीर से गोली या छर्रे जब्त नहीं किए गए, इसलिए धारा 307 लागू नहीं होती।
न्यायालय निर्णय की अहम बात
न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि “धारा 307 के अंतर्गत यह आवश्यक नहीं है कि आहत को गंभीर चोट पहुंचे, बल्कि जान से मारने की नीयत से किया गया हमला ही इस धारा को आकर्षित करता है।” न्यायालय ने बचाव पक्ष के सभी तर्कों को निराधार मानते हुए आरोपी रमेश पटेल को दोषी ठहराया और सजा सुनाई।
