
दमोह। जिले में एक बार फिर यातायात पुलिस की सक्रियता देखने को मिली है, लेकिन सवाल वही पुराना है कि क्या प्रशासन हमेशा किसी बड़े हादसे के बाद ही जागता है?

पुलिस अधीक्षक दमोह आनंद कलादगी के निर्देशन एवं सुजीत सिंह भदौरिया अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में यातायात पुलिस द्वारा यात्री बसों की सघन जांच अभियान चलाया गया।थाना प्रभारी यातायात निरीक्षक दलबीर सिंह मार्को ने यातायात स्टाफ के साथ शहर के किल्लाई नाका चौराहे पर यात्री बसों की चेकिंग की। इस दौरान बसों के दस्तावेजों की जांच की गई तथा ब्रेथ एनालाइजर के माध्यम से चालकों की शराब सेवन की स्थिति भी जांची गई।

चेकिंग के दौरान 06 बसों को जप्त किया गया, जिनमें 04 बस चालक शराब पीकर वाहन चलाते पाए गए, जबकि 02 बसों के वैध दस्तावेज नहीं मिले। शराब पीकर वाहन चलाने वाले चालकों के विरुद्ध प्रकरण तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा तथा उनके लाइसेंस निलंबन हेतु परिवहन विभाग को प्रतिवेदन भेजा जाएगा। इसके अलावा यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले 07 बस चालकों से 34 हजार रुपये का प्रशमन शुल्क वसूला गया।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई पहले नहीं हो सकती थी?
बीते दिनों नोहटा थाना क्षेत्र में एक बस चालक द्वारा शराब के नशे में बस चलाने के कारण बस पुलिया पर पलट गई थी, जिसमें 50 से अधिक यात्री घायल हुए थे। उस घटना के बाद अचानक प्रशासन सक्रिय हुआ और बसों की जांच शुरू कर दी गई।
DCP आनंद ट्रैफिक व्यवस्था पर रखते है पैनी नजर ।
इंदौर में DCP रहते हुए आनंद कलादगी ने कई हाई-विजिबिलिटी पुलिसिंग अभियानों पर जोर दिया था। खासतौर पर ड्रोन सर्विलांस, ट्रैफिक नियमों के पालन और शहर में सख्त चेकिंग अभियान उनके कार्यकाल की प्रमुख पहचान माने गए।
पहले भी हुए ऐसे बड़े हादसे….
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। विगत वर्ष कटनी रोड हाईवे पर एक डंपर चालक ने शराब के नशे में ऑटो को कुचल दिया था, जिसमें 9 से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद भी यातायात पुलिस और परिवहन विभाग ने बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाया था और डंपरों व ऑटो चालकों पर कार्रवाई की गई थी।
अब यह सवाल आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है कि आखिर व्यवस्था हर बार किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही क्यों जागती है? यदि नियमित और सख्त जांच पहले से होती रहे, तो शायद कई परिवारों को अपनों को खोने या हादसों का दर्द झेलने से बचाया जा सकता है।
वीडियो बना कर लूट रहे कार्यवाही की वाह-वाही।
वहीं नए पुलिस अधीक्षक के आने के बाद यातायात विभाग द्वारा कार्रवाइयों के वीडियो और फोटो बनाकर पुलिस के विभिन्न ग्रुपों में साझा किए जा रहे हैं, जिससे सख्त कार्रवाई का संदेश देने और वाहवाही बटोरने का प्रयास दिखाई दे रहा है। हालांकि जमीनी स्तर पर वास्तव में कितनी प्रभावी और नियमित कार्रवाई हो रही है, यह आज भी आम जनता के बीच एक बड़ा प्रश्नचिन्ह बना हुआ है।