दमोह में पदस्त और पूर्व में पदस्त अधिकारियों को मिला निरीक्षक का दर्जा।कार्यमुक्त में विभागीय जांच बनेगी रोड़ा।

दमोह। पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा लंबे समय से लंबित पदोन्नति सूची जारी कर दी गई है। जारी आदेश में प्रदेशभर के 1000 से अधिक कार्यवाहक निरीक्षकों एवं उप निरीक्षकों को पदोन्नत कर निरीक्षक बनाया गया है। इस सूची में दमोह जिले में पदस्थ कई पुलिस अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं।

दमोह जिले में वर्तमान में पदस्थ अधिकारियों में कोतवाली थाना प्रभारी मनीष कुमार, पथरिया थाना प्रभारी नेहा करौलिया, बटियागढ़ थाना प्रभारी रजनी शुक्ला, तेंदूखेड़ा थाना प्रभारी सरोज ठाकुर, महिला थाना प्रभारी फमीदा खान, अजाक थाना प्रभारी रचना मिश्रा, देहात थाना प्रभारी धर्मेंद्र उपाध्याय, हिंडोरिया थाना प्रभारी अंजलि अग्निहोत्री, विशेष शाखा प्रभारी सोनाली जैन,तथा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पदस्थ अमिता अग्निहोत्री और निरीक्षक अमित मिश्रा को निरीक्षक पद पर पदोन्नत किया गया है।

दमोह में पदस्थ रहे ये अधिकारी भी बने निरीक्षक।

पदोन्नति सूची में दमोह में पूर्व में सेवाएं दे चुके कई कार्यवाहक निरीक्षक एवं उप निरीक्षकों के नाम भी शामिल हैं। इनमें पूर्व कोतवाली थाना प्रभारी सत्येंद्र सिंह राजपूत (वर्तमान थाना प्रभारी फूप भिंड), मनीष मिश्रा (वर्तमान टीकमगढ़), आनंद ठाकुर (वर्तमान सिविल लाइन थाना प्रभारी सागर), विजय राजपूत (वर्तमान थाना प्रभारी तिरोडी बालाघाट), आनंद राज (वर्तमान विदिशा), अमित गौतम (वर्तमान पीटीएस सागर), मनोज गोयल (वर्तमान ईशानगर थाना प्रभारी छतरपुर), रवि भूषण पाठक (वर्तमान टीकमगढ़), श्याम बैन (वर्तमान छतरपुर), अंजलि उदैनिया (वर्तमान सागर), श्रद्धा शुक्ला (वर्तमान छतरपुर) तथा धर्मेंद्र जानवर (वर्तमान ग्वालियर) के नाम भी शामिल हैं

विभागीय जांच बनेगी कार्यमुक्ति में रोड़ा।

पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी पदोन्नति आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि पदोन्नति सूची में शामिल किसी अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच (DE), निलंबन, न्यायालय में लंबित आपराधिक प्रकरण अथवा अभियोजन स्वीकृति प्रभावी है, तो ऐसे अधिकारी को पदोन्नत पद पर कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे सभी मामलों की जानकारी संबंधित इकाई प्रमुखों को तत्काल पुलिस मुख्यालय भेजनी होगी।
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिन अधिकारियों ने निर्धारित मूलभूत प्रशिक्षण पूर्ण नहीं किया है, उनकी पदोन्नति प्रशिक्षण पूरा होने तक प्रभावी नहीं होगी। साथ ही सभी पदोन्नत अधिकारियों को वेतन निर्धारण के लिए एक माह के भीतर नियमानुसार अपनी वर्तमान इकाई में विकल्प प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
इस व्यापक पदोन्नति आदेश से प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के साथ-साथ थानों के प्रशासनिक संचालन एवं कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण सहायता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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