प्रधानमंत्री को भेंट की राजा किशोर सिंह की प्रतिमा

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दमोह। जिले में स्वातंत्र्य क्रांति और आजादी की लड़ाई में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर सपूतों का एक बड़ा इतिहास है। आधुनिक युग में अब गुमनाम रहे ऐसे वीर सपूतों का इतिहास हर भारतवासी के सामने आ रहा है। इस परिवर्तन के साक्षी बन रहे दमोह सांसद राहुल सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट कर उन्हें बुंदेलखंड की इस वीरता और आजादी के सपूतों से रूबरू कराया।
शुक्रवार को दमोह सांसद ने अपने परिजनों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नई दिल्ली संसद भवन में आत्मीय एवं सौहार्दपूर्ण भेंट की और उन्हें 1857 की क्रांति के अंतिम रणबांकुरे, वीर योद्धा एवं जिले की हिण्डोरिया के महदेले लोधी कुटुंब के पूर्वज राजा किशोर सिंह जूदेव लोधी के अद्वितीय शौर्य, बलिदान एवं 1842-1857 स्वतंत्रता संग्राम में उनके ऐतिहासिक योगदान से अवगत कराया।
प्रतिमा लोकार्पण का दिया न्योता
इस दौरान सांसद राहुल सिंह लोधी ने जिले में प्रस्तावित राजा किशोर सिंह जूदेव लोधी की भव्य प्रतिमा के लोकार्पण समारोह में पधारने हेतु सादर आग्रह किया। साथ ही उनके द्वारा उन्हें उन्हें राजा किशोर सिंह लोधीकी प्रतिमा भी भेंट की।
क्रांति के महानायकों में रहे शामिल
उल्लेखनीय है कि राजा किशोर सिंह जू भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1842 क्रांति में लड़ने वाले हिंडोरिया रियासत के वीर शासक एवं 1857 की क्रांति के अंतिम महानायकों में थे। वर्ष 1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेजों ने राजगढ़ी हिंडोरिया को अपनी 8 पाउंड की तोपों से ध्वस्त कर दिया था, जिसके अवशेष आज भी इतिहास के साक्षी हैं।ब्रिटिश सरकार ने राजा किशोर सिंह लोधी जूदेव को जीवित या मृत पकड़ने पर 1 हजार रुपये का इनाम घोषित किया। इन्ही वीरों का प्रभाव था कि इस दौरान क्षेत्र 10 माह तक अंग्रेजी शासन से मुक्त रहा। उन्होंने मध्य प्रदेश दमोह जिला के कुम्हारी थाने से चार महीने से अधिक विद्रोह का संचालन किया। यह अखंड भारत के इतिहास की एक अद्वितीय घटना मानी जाती है।दिसंबर 1858 तक राजा किशोर सिंह जू अंग्रेज सरकार के विरुद्ध संघर्षरत रहे और अंग्रेज सरकार की अंतिम संधि 10 अगस्त 1858 में उनके साथ ही हुई। इसी कारण उन्हें 1857 की क्रांति में अंग्रेजों से अंतिम समय तक लड़ने वाले वीर राजा के रूप में स्मरण किया जाता है।
