
हिंडोरिया थाने की कार्रवाई बनी चर्चा का विषय, गांजे की बरामदगी से तीन पेटी शराब तक कई सवाल
दमोह। पथरिया अनुभाग के हिंडोरिया थाना क्षेत्र में दो दिन पहले एनडीपीएस एक्ट के तहत हुई कार्रवाई अब आम लोगों में चर्चा का विषय बनी हुई है। कार्रवाई में आरोपी महिला से गांजा और शराब बरामद होने की बात सामने आई है, लेकिन बरामदगी की परिस्थितियों से लेकर जब्त सामग्री के रिकॉर्ड तक कई सवाल उठ रहे हैं। इस प्रकरण में एफआईआर नंबर 260/26 दर्ज है, जिसमें आरोपी शशि राय बताई जा रही हैं।
गृहणी महिला के पास गांजा पहुंचा कैसे?
मामले में सबसे बड़ा सवाल आरोपी महिला की भूमिका को लेकर है। यदि महिला गृहणी है और उसके पास से गांजा बरामद हुआ तो सवाल है कि गांजा उसके पास पहुंचा कैसे? यदि पुलिस का दावा है कि गांजा झाड़ियों में मिला था, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि महिला उस गांजे को लेकर किसे बेचने जा रही थी।क्या कोई संभावित ग्राहक था? क्या मोबाइल कॉल, चैट, लेन-देन या किसी अन्य स्वतंत्र साक्ष्य से गांजा बेचने की मंशा की पुष्टि हुई? यदि नहीं, तो इस पूरी कहानी की पुष्टि किस आधार पर हुई—यह जांच का विषय है।
गांजा कहां से आया, परिवार में कोई और तो शामिल नहीं?
सूत्रों का दावा है कि गांजा झाड़ियों से नहीं बल्कि किसी अन्य स्थान से बरामद किया गया था। यदि यह दावा सही है तो बरामदगी के वास्तविक स्थान की जांच जरूरी है।साथ ही यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि क्या गांजा महिला के घर में रखा था या किसी अन्य व्यक्ति से उसे मिला था। क्या परिवार का कोई सदस्य गांजे की खरीद-फरोख्त से जुड़ा था? इन सवालों का जवाब मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों से तलाशा जा सकता है।
तीन पेटी शराब का क्या हुआ?
सूत्रों के अनुसार कार्रवाई के दौरान आरोपी महिला के पास से तीन पेटी शराब भी बरामद की गई थी, लेकिन अब यह शराब कथित तौर पर गायब बताई जा रही है।यदि शराब जब्त हुई थी तो उसका जब्ती रिकॉर्ड कहां है? मालखाना रजिस्टर में उसका इंद्राज क्या है और वर्तमान में वह शराब कहां है? इस पूरे मामले का जवाब मालखाने के भौतिक सत्यापन से आसानी से सामने आ सकता है।


गांजे की मात्रा में भी हेरफेर का दावा
सूत्र गांजे की बरामद मात्रा में भी हेरफेर किए जाने की बात कह रहे हैं। यदि मौके पर बरामद वास्तविक मात्रा और प्रकरण में दर्ज मात्रा अलग है तो यह बेहद गंभीर विषय होगा।जप्ती पंचनामा, वजन की प्रक्रिया, एफएसएल भेजे गए नमूने और मालखाना रिकॉर्ड का मिलान कर इस दावे की सच्चाई सामने लाई जा सकती है।
कार्रवाई पर प्रेस नोट क्यों नहीं?
पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी के निर्देशानुसार जिले में पुलिस की विभिन्न कार्रवाइयों और गतिविधियों के प्रेस नोट जारी किए जाते हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि एनडीपीएस जैसे गंभीर मामले में आज तक आधिकारिक प्रेस नोट क्यों जारी नहीं किया गया? यदि कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी और नियमानुसार हुई है तो पुलिस की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने रखने में क्या दिककित थी???
सूत्रों के दावों की जांच जरूरी
फिलहाल तीन पेटी शराब के गायब होने, गांजे की मात्रा में हेरफेर और गांजा झाड़ियों के बजाय किसी अन्य स्थान से मिलने संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन यदि इन दावों में जरा भी सच्चाई है तो मामला गंभीर जांच की मांग करता है।ऐसे में पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं और जांच के बाद तथ्य मीडिया के सामने रख सकते हैं।
सीसीटीवी और पुलिसकर्मियों की लोकेशन से खुल सकता है राज
जांच में सबसे पहले हिंडोरिया थाने के संबंधित समय के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित किए जाना जरूरी है। इसके साथ ही कार्रवाई में शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों की उस दिन की मोबाइल लोकेशन को साइबर सेल के तकनीकी रिकॉर्ड के माध्यम से जांचा जाना चाहिए।सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, जब्ती पंचनामा और मालखाना रिकॉर्ड का मिलान होने पर यह स्पष्ट हो सकता है कि आरोपी को कहां से लाया गया, बरामदगी वास्तव में कहां हुई और जब्त सामग्री थाने पहुंचने के बाद उसके साथ क्या प्रक्रिया अपनाई गई।
मालखाने के भौतिक सत्यापन से साफ होगी तस्वीर
गांजा और कथित तीन पेटी शराब यदि जब्त हुई थी तो मालखाने में उसकी मौजूदगी का भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। रजिस्टर में दर्ज सामग्री और मौके पर मौजूद सामग्री का मिलान ही कई सवालों का सीधा जवाब दे सकता है।
एएसआई रामकुमार ठाकुर कर रहे विवेचना
प्रकरण में सहायक उप निरीक्षक रामकुमार ठाकुर को विवेचना अधिकारी बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में विवेचना में बरामदगी के वास्तविक स्थान, गांजे के स्रोत और जब्त शराब की स्थिति को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा।
“दिनाँक 06.08.26 को मुखबिर द्वारा सूचना प्राप्त हुई की एक महिला बांदकपुर फाटक के आगे गांजा विक्रय कर रही है मुखबिर द्वारा बताए गए स्थान पर जाकर रेड कार्यवाही किया जाे एक महिला अबैध गांजा रखे हुए मिली जिसके कब्जे से 700 ग्राम मादक पदार्थ गांजा कीमती 5000 रुपये का जप्त कर उक्त आरोपियो के विरुद्ध अपराध कायम कर विवेचना में लिया गया।” -थाना प्रभारी हिंडोरिया
अब जांच से ही सामने आएगा सच
फिलहाल मामला सूत्रों से सामने आए दावों और उठ रहे सवालों के बीच है। किसी अधिकारी या कर्मचारी पर अनियमितता का निष्कर्ष जांच के बिना नहीं निकाला जा सकता।लेकिन तीन पेटी शराब, गांजे की मात्रा, बरामदगी का वास्तविक स्थान, सीसीटीवी, पुलिसकर्मियों की लोकेशन और मालखाने का भौतिक सत्यापन—इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच हो तो पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
अब सवाल कार्रवाई पर नहीं, बल्कि कार्रवाई की पारदर्शिता पर है।
जांच में इन सवालों का जवाब जरूरी
आरोपी महिला के पास गांजा कहां से आया?
यदि गांजा झाड़ियों में मिला था तो वह उसे लेकर बेचने क्यों निकली?
वह गांजा किसे बेचने वाली थी?
क्या कथित ग्राहक या खरीदार का कोई स्वतंत्र साक्ष्य है?
क्या गांजा महिला के घर से बरामद हुआ या किसी अन्य स्थान से?
क्या परिवार का कोई अन्य सदस्य गांजे की खरीद-फरोख्त से जुड़ा था?
महिला के पास से बरामद बताई जा रही तीन पेटी शराब वर्तमान में कहां है?
गांजे की वास्तविक बरामद मात्रा कितनी थी और रिकॉर्ड में कितनी दर्ज है?
थाने के सीसीटीवी फुटेज में क्या दर्ज है?
मालखाने में जब्त सामग्री का भौतिक सत्यापन किया गया या नहीं?