हत्यारे पति को न्यायालय ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा
एक वर्ष पूर्व के हत्याकांड पर न्यायालय ने सुनाया फैसला
दमोह। करवा चौथ के दिन हुई हत्या के मामले में न्यायाधीश पंकज कुमार वर्मा की अदालत ने आरोपी रितेश उर्फ राजा ठाकुर को दोषी मानते हुए सश्रम आजीवन कारावास एवं एक हजार रुपये अर्थदंड की सज़ा सुनाई है। शासन की ओर से पैरवी करने वाले शासकीय अभिभाषक राजीव बद्री सिंह ठाकुर ने बताया कि घटना दिनांक 20 अक्टूबर 2024 की शाम को फरियादी एवं ड्राइवर हरीराम साहू बस स्टैंड पर अपनी बस धो रहा था। उसी दौरान बस का कर्मचारी और आरोपी रितेश उर्फ राजा ठाकुर निवासी फुटेरा वार्ड नं 2 दमोह की पत्नी गीता उसे लेने वहां पहुंची। आरोपी रितेश शराब के नशे में था और घर जाने से मना करने पर दोनों के बीच विवाद हो गया।
विवाद के बाद मारा चाकू
घटना के पति पत्नी के बीच विवाद बढ़ गया और उनके बीच मारपीट भी शुरू हो गई। मारपीट को देख मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर दोनों को अलग किया, लेकिन थोड़ी देर बाद आरोपी रितेश फिर लौटा और गीता के सीने में चाकू मार दिया। गंभीर रूप से घायल गीता को पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
सीसीटीवी फुटेज की कमी को न्यायालय ने नकारा
मामले में कोतवाली थाना में आरोपी के विरुद्ध हत्या का प्रकरण दर्ज कर जांच उपरांत न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। अभियोजन की ओर से 13 साक्षियों के बयान कराए गए। मामले में आरोपी का तर्क था किघटना में प्रयुक्त चाकू पुलिस ने जप्त नहीं किया, न ही घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज एकत्र किए गए,और यदि ये साक्ष्य लाए जाते, तो वह निर्दोष साबित हो सकता था। वहीं मामले में न्यायालय ने यह माना कि जब चक्षुदर्शी गवाहों के बयान चिकित्सकीय साक्ष्य से पूर्णतः पुष्ट हो रहे हों, तो मात्र हथियार या सीसी फुटेज नहीं मिलने से अभियोजन कहानी संदेहास्पद नहीं हो जाती। न्यायालय ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 के तहत दोषी पाते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई।
