
राष्ट्र वैभव हिंडोरिया। बीते दिनों हिंडोरिया क्षेत्र में सामने आए गांजा कांड में सहायक उप निरीक्षक रामकुमार ठाकुर की भूमिका को लेकर उठे सवालों के बाद अब उन्हीं पर एक स्थानीय स्थाई वारंटी राकेश उर्फ बटई के साथ मारपीट कर उसका पैर तोड़ने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। पीड़ित द्वारा दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि 9 अगस्त को पुलिस थाने में पेश हुए था। उसी रात थाने में सहायक उप निरीक्षक रामकुमार ठाकुर तथा एक प्रधान आरक्षक ने नशे की हालत में उसके साथ मारपीट की। आरोप है कि मारपीट के दौरान उसके पैर में गंभीर चोट आई और पैर टूट गया।
9 अगस्त की पेश हुए था, देर रात मारपीट का आरोप
बताया जा रहा है कि राकेश उर्फ बटई को 9 अगस्त को पुलिस थाने में पेश हुए था। पीड़ित के आवेदन के अनुसार उसी रात देर रात उसके साथ सहायक उप निरीक्षक रामकुमार ठाकुर और एक प्रधान आरक्षक द्वारा कथित तौर पर मारपीट की गई। पीड़ित का आरोप है कि दोनों पुलिसकर्मी उस समय नशे की हालत में थे। मारपीट के बाद उसके पैर में गंभीर चोट आई और पैर टूट गया।
10 अगस्त को इलाज के लिए निजी अस्पतालों में ले गए
घटना के अगले दिन यानी 10 अगस्त को पीड़ित को इलाज के लिए निजी अस्पतालों में ले जाया गया। बताया जा रहा है कि उसे शहर के तीन-चार निजी अस्पतालों में ले जाया गया, लेकिन वहां चिकित्सक उपलब्ध नहीं मिले। इसके बाद उसे तीन गुल्ली स्थित को ट्रामा फ्रैक्चर हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उसके पैर में प्लास्टर चढ़ाया गया।
इलाज कराने के बाद उसे वापस थाने लाया गया और 10 अगस्त की रात उसे वही रोककर रखा गया। इसके बाद अगले दिन 11 अगस्त को उसे न्यायालय में पेश किया गया।
11 अगस्त को न्यायालय में पेशी, फिर जमानत
जानकारी के अनुसार 11 अगस्त को राकेश उर्फ बटई को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसकी जमानत कराई गई। न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे उसके घर छोड़ दिया गया।इस पूरे घटनाक्रम में सवाल यह भी उठ रहा है कि 9 अगस्त की रात कथित मारपीट में पैर टूटने के बाद 10 अगस्त को इलाज कराया गया और पैर में प्लास्टर चढ़ाया गया, फिर 11 अगस्त को उसे न्यायालय में पेश किया गया। ऐसे में न्यायालय में पेशी के दौरान उसके साथ हुई चोट और कथित मारपीट की जानकारी सामने आई या नहीं, यह भी जांच का विषय है।
एक्स-रे में फ्रैक्चर की पुष्टि, रिपोर्ट भी पुलिस ने रखी
घटना के बाद राकेश उर्फ बटई को हिंडोरिया के प्राथमिक उपचार केंद्र ले जाकर उसका एक्स-रे कराया गया था। बताया जा रहा है कि जांच में पैर में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। आरोप है कि एक्स-रे और उससे संबंधित दस्तावेज पीड़ित को उपलब्ध नहीं कराए गए, बल्कि पुलिस ने उन्हें अपने पास ही रख लिया।

मेडिकल जांच में फ्रैक्चर की पुष्टि होने के बावजूद पीड़ित को एक्स-रे और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब जांच में यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि मेडिकल दस्तावेज किसके पास हैं और पीड़ित को उनकी प्रति क्यों नहीं दी गई।
एसपी को दी शिकायत, जांच की बात
मामला सामने आने के बाद पीड़ित ने 18 अगस्त को पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी (IPS) को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। पीड़ित द्वारा दिए गए आवेदन में पुलिसकर्मियों पर मारपीट करने तथा ड्यूटी के दौरान नशे में होने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस अधीक्षक द्वारा संबंधित मामले की जांच किए जाने की बात कही गई है।
ड्यूटी के दौरान नशे में होने के आरोप पर भी सवाल

पीड़ित द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि उसके साथ मारपीट करने वाले सहायक उप निरीक्षक और प्रधान आरक्षक उस समय नशे की हालत में थे। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो यह केवल मारपीट का मामला नहीं रह जाता, बल्कि पुलिसकर्मियों के ड्यूटी के दौरान नशे में होने को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले पुलिसकर्मी यदि ड्यूटी के दौरान नशे की हालत में पाए जाते हैं तो यह विभागीय अनुशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली दोनों के लिए गंभीर विषय है। ऐसे में यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि घटना के समय संबंधित पुलिसकर्मी ड्यूटी पर थे या नहीं और यदि थे तो क्या उस समय उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया था।
मामला सामने आने के बाद एएसआई छुट्टी पर
इधर घटना की जानकारी मीडिया में सामने आने के बाद सहायक उप निरीक्षक रामकुमार ठाकुर के छुट्टी पर चले जाने की जानकारी सामने आई है। उनसे 12 अगस्त को संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन बताया गया कि वह छुट्टी के लिए रवाना हो चुके हैं। ऐसे में उनका पक्ष सामने नहीं आ सका है।
अब जांच में सामने आएगा पूरा सच

पूरे मामले में 9 अगस्त की रात हुई कथित मारपीट, 10 अगस्त को कराई गई मेडिकल जांच, एक्स-रे रिपोर्ट, निजी अस्पताल में कराया गया उपचार, पैर में चढ़ाया गया प्लास्टर, 11 अगस्त को न्यायालय में पेशी, जमानत के दस्तावेज और संबंधित पुलिसकर्मियों की ड्यूटी की जानकारी महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकती है।
अब देखना यह है कि पुलिस अधीक्षक द्वारा कराई जा रही जांच में इन सभी तथ्यों को शामिल किया जाता है या नहीं और पीड़ित के पैर में फ्रैक्चर होने की वास्तविक वजह, मारपीट के आरोप तथा ड्यूटी के दौरान नशे में होने के आरोपों पर क्या निष्कर्ष सामने आता है।