मौत के बाद बने हंगामे के हालात, 8 पुलिसकर्मियों को किया गया लाइन अटैच
लाइन अटैच पुलिसकर्मियों की सूची पर उठ रहे सवाल
दमोह। जिले के हिंडोरिया थाना क्षेत्र की बांदकपुर चौकी अंतर्गत गुरुवार को एक जुआ फड़ में रेड कार्यवाही के दौरान एक अधेड़ की मौत हो गई। मौत की जानकारी मिलने पर मृतक के परिजन और आमजन आक्रोश में आ गए आए उनके द्वारा हंगामा शुरू कर दिया गया। हंगामे के हालातों को देखते हुए हिंडोरिया समेत अन्य थानों का पुलिस बल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बुलाया गया और पुलिस महकमे के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे,उनके द्वारा परिजनों और जनप्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए हंगामे को शांत कराया। प्रारंभिक कार्यवाही में पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने तत्काल ही 8 पुलिस कर्मियों को लाइन अटैच करते हुए मामले की जांच विशेष टीम से कराए जाने आश्वासन दिया, साथ ही शव को देर रात सागर मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया।
हार्ट अटैक से मौत की आशंका
जानकारी अनुसार हिंडोरिया थाना की टीम ने बांदकपुर चौकी क्षेत्र में गुरुवार शाम एक जुआ फड़ पर छापा मारा। पुलिस टीम को देखकर मौजूद लोग भागने लगे और इन्हीं व्यक्तियों में शामिल व्यक्ति शिवसिंह उर्फ संतु पिता ज्ञानसिंह लोधी निवासी हलगज की हालत बिगड़ गई। व्यक्ति की बिगड़ती हालत देखकर मौजूद पुलिसकर्मियों ने पहले उसे सीपीआर देने की कोशिश की और उसके बाद तत्काल ही उसे समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हिंडोरिया लाया गया लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
आक्रोशित परिजनों ने लगाए आरोप
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस ने संबंधित परिजनों को हालात बिगड़ने की सूचना देकर उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हिंडोरिया पहुंचने के लिए कहा गया लेकिन जब परिजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे उन्हें वहां शव ही मिला। इसके चलते परिजनों ने मौत पर हत्या की आशंका के साथ पुलिस द्वारा लापरवाही बरतने के आरोप लगाए है। परिजनों का कहना है कि यदि मृतक की हालत बिगड़ रही थी तो उसे समीप के बांदकपुर उपस्वास्थ्य केंद्र ले जाने के स्थान पर दूर हिंडोरिया क्यों लाया गया और हिंडोरिया में भी उनका इलाज न करके शव को स्ट्रेचर पर रख दिया गया। आरोपों के बीच परिजन सहित अन्य लोग आक्रोशित हो गए और उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हंगामा शुरू कर दिया।मृतक के कांग्रेस कार्यकर्ता होने के चलते मामले की जानकारी मिलने पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष मानक पटेल, वरिष्ठ कांग्रेसी मनु मिश्रा और साथ ही पूर्व विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रद्युमन सिंह भी मौके पर पहुंचे और उनके द्वारा परिजनों से चर्चा कर प्रशासन से उचित कार्यवाही की मांग की गई और उचित कार्यवाही न होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई।
हालातों को संभालने लाइन अटैच कार्यवाही
देर रात चले हंगामे के बीच जहां लंबे समय तक परिजनों और पुलिस अधिकारियों के बीच चर्चाओं का दौर चलता रहा। इसी बीच पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हिंडोरिया पहुंचे और उनके द्वारा सभी लोगों के चर्चा के उपरांत आठ पुलिसकर्मियों पर लाइन अटैच की कार्यवाही कर दी गई। लाइन अटैच किए गए पुलिसकर्मियों में बांदकपुर चौकी प्रभारी राजेन्द्र मिश्रा, हिंडोरिया थाना एएसआई रामकुमार सिंह, प्रधान आरक्षक संजय पाठक, वीरेन्द्र मिश्रा,अविनाश जाट, देवेन्द्र ठाकुर,दीपचंद्र चौधरी, आरक्षक शिवसदन शामिल है। इसके साथ ही इस पूरे मामले की जांच पुलिस की विशेष टीम से कराए जाने सहित मृतक के शव का मेडिकल परीक्षण सागर में डॉक्टरों की विशेष टीम से कराए जाने के निर्देश देते हुए देर रात ही शव को सागर भेज दिया गया।
लाइन अटैच कार्यवाही पर सवाल
घटना पर उपजे आक्रोश और स्थितियों को संभालने के लिए पुलिस अधीक्षक ने तत्काल ही आवश्यक दिशा निर्देश देकर पुलिस कर्मियों को लाइन अटैच किया जाने की कार्यवाही तो की है, लेकिन कार्यवाही पर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। दरअसल सूत्र बताते हैं कि जुआफड़ पर की गई यह रेड एसडीओपी पथरिया प्रिया सिंधी के निर्देशन और मार्गदर्शन में की गई थी, और रेड टीम में हिंडोरिया थाना प्रभारी अग्निहोत्री भी शामिल थी। इसकी कोई भी पूर्व सूचना बांदकपुर पुलिस चौकी को नहीं दी गई थी और कार्यवाही के दौरान हुई मौत के बाद घटना की पूरी सूचना बांदकपुर चौकी प्रभारी को दी गई। ऐसे में रेड को बगैर जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दिए कराए जाने पर एसडीओ पथरिया की जिम्मेदारी तय ना होना और टीम में शामिल थाना प्रभारी पर कार्यवाही ना करते हुए चौकी प्रभारी को लाइन अटैच किया जाना कार्यवाही पर बड़े सवाल पैदा करता है। लगातार विवादों में पथरिया अनुविभागउल्लेखनीय है कि पथरिया अनुविभाग पिछले कई दिनों से लगातार चर्चाओं में है। पूर्व में चर्चित गांजा मामले,महिला की बच्चों सहित आत्महत्या मामले में पुलिस कार्यवाही पर कई सवाल उठे और लेनदेन के आरोप भी लगे, लेकिन हर बार कार्यवाही की जद कनिष्ठ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को लाकर मामले शांत कराए जाते रहे है। इस बार भी हालात ऐसे ही नजर आ रहे है।