फैसला: चेक बाउंस मामले में न्यायालय ने माना अमानती चेक का दुरुपयोग

फैसले में अभियुक्त को किया दोषमुक्त

दमोह। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) अनुप्रेक्षा जैन की ने चेक बाउंस के मामले में फैसला सुनाते हुए साक्ष्यों के अवलोकन और सामने आई दलीलों के आधार पर अभियुक्त को दोषमुक्त किया। मामले के संबंध में अभियुक्त की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता अनिल खरे ने बताया कि अभियुक्त संतोष आठ्या पर कोतवाली थाना क्षेत्र के मुकेश कॉलोनी निवासी रतनलाल विश्वकर्मा द्वारा ₹7 लाख 80 हजार रुपए के चेक बाउंस पर धारा 138 एनआई एक्ट के तहत मामला बनाया गया था। प्रकरण में परिवादी रतन लाल विश्वकर्मा एवं अभियुक्त संतोष अठ्या दोनो के मध्य काफी अच्छे संबंध और दोनो परस्पर एक दूसरे से परिचित होने के कारण लेन देन होता रहता था। इसके चलते उसने एक दस चक्का ट्रक क्रमांक एम पी 20 एच बी 2615 अभियुक्त के नाम से क्रय किया था जिसके लिये परिवादी को 7 लाख 80 हजार रूपये का चैक दिया था जो बाउंस हो गया। इस पर न्यायालय के समक्ष यह लाया गया किअभियुक्त ने परिवादी से कोई कर्ज नहीं लिया था। साल 2020 में एक ट्रक के फाइनेंस संव्यवहार के समय परिवादी रतनलाल ने संतोष अठ्या के नाम से वाहन खरीदा था और सुरक्षा के तौर पर एक अमानती चेक अपने पास रख लिया था। बाद में ट्रक की खरीद-बिक्री को लेकर हुए विवाद के बाद परिवादी ने इसी अमानती चेक में राशि भरकर झूठा मुकदमा दायर कर दिया था। न्यायालय ने सामने आए साक्ष्य और तर्कों के आधार पर यह माना कि चेक के भुगतान के समय अभियुक्त पर कोई विधिक देनदारी बकाया नहीं थी। जहां परिवादी का दावा था कि ट्रक की सारी किस्तें उसने चुकाईं, लेकिन कोर्ट रूम में यह साबित हो गया कि ट्रक की बची हुई 17 किस्तें और पेनाल्टी की राशि बचाव पक्ष के गवाह विनोद राय ने जमा की थी, साथ ही न्यायालय के रिकॉर्ड पर यह तथ्य लाया गया कि उक्त ट्रक का सौदा विनोद राय के साथ 1 लाख 62 हजार में तय हुआ था और परिवादी को उसकी तय राशि मिल चुकी थी । इन सभी तथ्यों को सही पाते हुए न्यायालय ने अभियुक्त को दोष मुक्त कर दिया।

अधिवक्ता अनिल खरे

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