कर्ण के जीवन के अनछुए पहलुओं को दिखाता नाटक “रश्मिरथी”

राष्ट्रीय नाट्य समारोह के द्वितीय दिवस मुम्बई के कलाकारों ने दी अपनी प्रस्तुति

महाकाव्य का नाट्य रूपांतरण देख दर्शक हुए रोमांचित, एकल शैली की नाट्य विधा को मिली सराहना

दमोह। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से युवा नाट्य मंच द्वारा नगर के अस्पताल चैक स्थित मानस भवन में 21वें पांच दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य समारोह के तृतीय दिवस शनिवार को सुरभि थियेटर ग्रुप बेगुसराय की मुम्बई इकाई द्वारा प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह दिनकर की कृति रश्मिरथी पर आधारित नाटक का मंचन किया गया। देश भर के दिग्गज कलाकारों द्वारा सराहा गया यह नाटक एकल शैली की नाट्य विधा से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस नाटक के निर्देशक और कलाकार को नाटक की विषयवस्तु अत्यंत कसी हुई रखना आवश्यक थी, जिसमें इस नाटक के निर्देशक हरीश हरिऔथ पूरी तरह सफल रहे है। नाटक की कहानी कर्ण के जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती है और इन पहलुओं से हमारे समाज की मौजूद विसंगतियों को भी दर्शाया गया है। कहानी कर्ण के जीवन में हुआ सामाजिक अन्याय और उससे उपजे आत्मीय सम्मान के भाव पर केंद्रित होता है। जिसमें सूर्य पुत्र होकर भी कर्ण को ना सिर्फ उसे त्याग सहना पड़ता है। महान योद्धा, महान दानवीर, प्रतिभाशाली होने के बाद भी उसे किस तरह से समाज में अपनी पहचान के लिए संघर्ष करना होता है। इस पहचान और सम्मान को देने बाले दुर्याधन के प्रति उसका सम्मान, समर्पण, कृतज्ञता के लिए भगवान कृष्ण का संदेश और चेतावनी के बाद भी अपना सर्वस्व दे देना ही कर्ण का प्रतीक बताया गया है। नाटक में कुंती से संवाद और अपने कर्ण और कुंडल दान में दे देना कर्ण की महानता को दर्शाते है और उसकी मृत्यु को भी समाज के आधार पर कर्म के प्रति सोचने पर विवश करती है।

नाटक के निर्देशन के साथ अभिनय की जिम्मेदारी भी हरीश हरिऔथ ने निभाई है और दोनो ही पक्षों में उनका राष्ट्रीय नाट्य विधालय और वर्षों का अनुभव स्पष्ट नजर आता है। अपने अभिनय से वह नाटक के प्रत्येक पक्ष को जनमानस के मन मस्तिस्क में उतारने में सफल रहे है। संगीत पक्ष में आधुनिक दौर में रिकाॅर्डेट संगीत के साथ परंपरागत तरीकों और लाइव संगीत दोनो का प्रयोग किया गया है और संगीतकार विष्णुदेव दास और आशीष कुलकर्णी, सदानंद वासुदेव मल्लिक ने अपनी जिम्मेदारी को पूर्ण रूप से निभाया है। आशीष कुलकर्णी ने ही प्रकाश संयोजन किया है। अजय कुमार भारती ने मंच सज्जा को कालखंड के अनुसार रचा है और दर्शक मंच को देखकर कालखंड से खुद को जोड़ लेते है। प्रकाश संरचना राष्ट्रीय नाट्य विधालय के संजय कुमार सोनू और सहयोग जयंत गाडेकर और दिनेश कुमार गुप्ता का रहा है।

आज होगा लछिया का मंचन

नाट्य समारोह के चतुर्थ दिवस स्ट्रीट फैक्ट कल्चरर एंड वेलफेयर सोसायटी भोपाल के कलाकारों द्वारा वसीम अली और जैकी भावसार द्वारा लिखित और वसीम अली द्वारा निर्देशित नाटक लछिया का मंचना किया गया जाएगा।

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