20 दिन से अपनी बच्ची से मिलने के लिए तड़प रही पीड़ित ममता
पीड़िता का आरोप: अनर्गल दस्तावेज मंगाकर बाल कल्याण समिति कर रही परेशान, दुराचार पीड़िता की पहचान भी हो रही उजागर
दमोह। बाल कल्याण समिति दमोह पर एक दुराचार के चलते मां बनी एक किशोरी द्वारा गंभीर आरोप लगाये गए है। आरोप है कि बाल कल्याण समिति ने नियमों और न्यायालय की गाइडलाइन को दरकिनार करते हुए पीड़िता की 8 माह की दुधमुंही बच्ची को उससे दूर कर अन्य जिले में भेज दिया और पिछले 20 दिनों से पीड़ित मां अपनी बच्ची से मिलने और उसे बापस पाने के लिए भटक रही है। वहीं बच्ची को वापस दिए जाने के स्थान पर बाल कल्याण समिति पीड़िता को ना सिर्फ़ घंटों बैठाकर परेशान कर रहे है बल्कि अनावश्यक दस्तावेज भी मांगे जा रहे है जिसके चलते उसकी पहचान और दुराचार पीड़िता होने की जानकारी भी सार्वजनिक हो रही है।हालात यह है कि बच्ची की मांग कर रही पीड़िता द्वारा दिए जा रहे आवेदनों की पावती देने से भी बाल कल्याण समिति इंकार कर रही है। समिति का यह कार्य न्यायालय की उन गाइडलाइन का स्पष्ट उन्लंघन है जिसमें छोटे बच्चों को उनकी मां से दूर नहीं किए जाने की बात कही गई है।
जानकारी अनुसार पथरिया थाना क्षेत्र में दुराचार की शिकार हुई एक नावालिग दुराचार के चलते गर्भवती हो गई और उसने एक बच्ची को जन्म दिया। मामला सामने आने के बाद न्यायालय ने पॉक्सो एक्ट के तहत दुराचार के आरोपी को जेल भेज दिया, और पीड़िता अपनी नानी और बच्ची के साथ रखकर अपना जीवन यापन करने लगी।
फर्जी शिकायत को बना रहे आधार
इस दौरान एक शिकायत के आधार पर बाल कल्याण समिति ने बालिग हो चुकी पीड़िता और बच्ची को समिति के समक्ष बुलाया और उसके पीड़िता द्वारा बच्ची के पालन पोषण खुद करने के कथन किए जाने के बाद भी व्यक्तिगत शंका के आधार पर बच्ची को सागर बाल आश्रम भेज दिया। पीड़िता के विरुद्ध की गई शिकायत पुलिस जांच में असत्य भी पाई गई लेकिन उसके बाद पीड़िता को ना सिर्फ लगातार परेशान कर घंटों पूछताछ के लिए बिठाया जाता है बल्कि उसे उसकी 8 माह की बच्ची से मिलने नहीं दिया जा रहा है। इस मामले को लेकर पीड़िता कलेक्टर के समक्ष भी आवेदन कर चुकी है लेकिन 10 दिन से अधिक बीत जाने पर भी कोई कार्यवाही बाल कल्याण समिति के विरुद्ध नहीं हुई, ना पीड़िता को उसकी बच्ची वापस मिली।
दर दर भटक रही पीड़िता
अपनी बच्ची से दूर होकर न्याय और बाल कल्याण समिति पर कार्यवाही की मांग को लेकर पीड़िता दर भटक रही है। जहां उसके द्वारा आवेदन और मौखिक रूप से जाकर बच्ची बापस दिलाए जाने के मांग की जा रही है और फिर कलेक्टर को भी नियमानुसार कार्यवाही की मांग को लेकर आवेदन दिया गया है। इसके अलावा पीड़िता ने पुलिस को भी आवेदन सौंपते हुए उसकी पहचान उजागर होने सहित उसकी 8 माह की बच्ची और पीड़िता के साथ कोई भी अप्रिय घटना होने पर बाल कल्याण समिति के जिम्मेदार होने की बात कही है।
बाल कल्याण समिति अध्यक्ष की मनमानी
इस पूरे मामले में बाल कल्याण समिति अध्यक्ष दीपक तिवारी की मनमानी भी सामने आई है। आरोप है कि बाल कल्याण समिति अध्यक्ष खुद को न्यायाधीश बताते हुए पीड़िता के आवेदन पर पावती देने से इंकार कर देते है वहीं समिति के समक्ष किसी भी अधिवक्ता के आने की अनुमति ना होने के नियम का भी हवाला देते है। ऐसे में नावालिगी में दुराचार का शिकार हुई पीड़िता अपना पक्ष भी ठीक तरह से नहीं रख पा रही है और उसे उसके विरुद्ध हुई शिकायत और शिकायतकर्ता की भी कोई जानकारी उसे नहीं दी जा रही और ऐसे हालात बनाकर समिति पीड़िता को उसकी बच्ची से दूर किए हुए है। आरोप यह भी है कि बाल कल्याण समिति अध्यक्ष द्वारा पुलिस पर झूठी जांच रिपोर्ट बनाने का भी दबाव बनाया जा रहा है।
मेरी बच्ची को जबरन छीन कर दूसरे जिले भेज दिया गया है।मैं पिछले कई दिनों से भटक रही हूँ, लेकिन मेरी बेटी मुझे वापस नहीं दी जा रही है और मुझे परेशान किया जा रहा है।
पीड़िता
बच्ची क्यों नहीं दी जा रही यह बाल कल्याण समिति का विषय है। हमारे पास मामले की शिकायत आई थी, जिसकी जांच की गई है, जो उन्हें प्रेषित की जाएगी।
सुजीत भदौरिया
एएसपी